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उत्तराखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों को लेकर संसद में उठा सवाल, डॉ. नरेश बंसल ने मांगी परियोजनाओं की स्थिति

The issue of national highways in Uttarakhand was raised in Parliament, with Dr. Naresh Bansal seeking information on the status of the projects.

नई दिल्ली/देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने संसद में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति, दिल्ली–देहरादून एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे, अन्य एनएच परियोजनाओं तथा आपदा में क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

डॉ. बंसल ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से पूछा कि उत्तराखंड में दिल्ली–देहरादून बारहमासी सड़क सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कब तक पूरा होगा, निर्माण के दौरान चट्टान कटान व ढलान उपचार के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, विभिन्न एनएच पर क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण की समयसीमा क्या है, तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कितने गांवों को जोड़ा जा चुका है।

अप्रैल 2028 तक पूरे होंगे अधिकांश एनएच प्रोजेक्ट

जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बताया कि दिल्ली–देहरादून एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे से जुड़ी परियोजनाओं की पैकेज-वार स्थिति अनुलग्नक में दी गई है। उत्तराखंड में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रहे कार्यों को अप्रैल 2028 तक पूरा करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार उत्खनन, चट्टान कटाई और ढलान स्थिरीकरण कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए प्राधिकरण इंजीनियर और स्वतंत्र इंजीनियरों द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है।

पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा-रोधी सड़क अवसंरचना पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहाड़ी राज्यों में आपदा-प्रतिरोधी राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें भूस्खलन प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक सुधारात्मक उपाय, सड़क निर्माण से पहले ढलान स्थिरीकरण, तथा नवंबर 2025 तक एक व्यापक नीति परिपत्र को अंतिम रूप देना शामिल है।

इसके अलावा उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के लिए विशेष भूस्खलन प्रबंधन उपायों को लेकर टीएचडीसीआईएल, डीजीआरई, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और राष्ट्रीय शैल यांत्रिकी संस्थान के साथ समझौता ज्ञापन किए गए हैं।

क्षतिग्रस्त पुलों की स्थिति

देहरादून–पांवटा साहिब:
एनएच-72 पर प्रेमनगर के पास स्थित क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर बाईपास का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कार्य काफी हद तक पूरा हो चुका है। पुल मरम्मत के लिए लगभग 17 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एनएचआई को भेजा गया है।

देहरादून–हरिद्वार:
पुराना दो लेन जाखन पुल 2025 के मानसून में क्षतिग्रस्त हुआ था। फिलहाल यातायात नए पुल से संचालित हो रहा है। नए पुल का निर्माण जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

देहरादून–मसूरी:
आर्य ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद अस्थायी वैली ब्रिज लगाया गया है। यहां 60 मीटर स्पैन का नया पुल प्रस्तावित है, जिसे जून 2026 तक पूरा किया जाएगा।

देहरादून–सहारनपुर:
इस मार्ग पर किसी भी पुल को नुकसान नहीं पहुंचा है।

पीएमजीएसवाई के तहत 1860 बस्तियों को मिली सड़क सुविधा

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-1) के तहत उत्तराखंड में कुल 1864 पात्र बस्तियों को स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 1860 बस्तियों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान की जा चुकी है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।

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