Skip to main content

Latest News

देहरादून में जिला योजना समिति के नवनिर्वाचित सदस्यों को मिले प्रमाण पत्र

देहरादून में जिला योजना समिति के नवनिर्वाचित सदस्यों को मिले प्रमाण पत्र

विकास कार्यों को गति देने का आह्वान

देहरादून। जनपद देहरादून में जिला योजना समिति (डीपीसी) सामान्य निर्वाचन-2026 की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई है। 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद, शनिवार को जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान तथा देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को जीत के प्रमाण पत्र सौंपकर शुभकामनाएं दीं।

ऐतिहासिक डोला-पालकी आंदोलन के द्वारा समाज में अलख जगाने का काम किया कर्मवीर जयानंद भारती ने: महाराज

ऐतिहासिक डोला-पालकी आंदोलन के द्वारा समाज में अलख जगाने का काम किया कर्मवीर जयानंद भारती ने: महाराज

समाज सुधारक, उत्तराखंड रत्न कर्मवीर जयानंद भारती की 146वीं जयंती पर दो दिवसीय राजकीय मेले का शुभारंभ

बीरोंखाल (पौड़ी)। स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक कर्मवीर जयानंद भारती ने ब्रिटिश अधिकारी (संयुक्त प्रांत के गवर्नर) लॉर्ड मैलकम हेली (मैलकम हैली) के सामने तिरंगा फहराया था और 'गो बैक मैलकम हेली' के नारे लगाए थे। उस समय मैलकम हैली ने कहा था कि यदि वह पिस्तौल निकाल कर मुझे मार देते तो मैं उनका कुछ नहीं बिगड़ा सकता था।

बांग्लादेश में कड़ी सुरक्षा के बीच दुर्गा पूजा, 33,851 पंडालों में हो रहे आयोजन

बांग्लादेश में कड़ी सुरक्षा के बीच दुर्गा पूजा, 33,851 पंडालों में हो रहे आयोजन

दुर्गा पूजा पर पांच दिन की छुट्टी

ढाका। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के प्रमुख धार्मिक पर्व दुर्गा पूजा को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। त्योहार के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पूजा स्थलों पर पुलिस और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है। इस बीच प्रधानमंत्री तारिक रहमान और राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने हिंदू समुदाय को दुर्गा पूजा की बधाई देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता, समान अधिकार और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया है।

ज्यादा सफेद चावल खाने से बढ़ सकती हैं सेहत से जुड़ी परेशानियां, जानें किन बातों का रखें ध्यान

ज्यादा सफेद चावल खाने से बढ़ सकती हैं सेहत से जुड़ी परेशानियां, जानें किन बातों का रखें ध्यान

भारतीय खानपान में चावल की अहम जगह है। दाल-चावल से लेकर राजमा-चावल और कढ़ी-चावल तक, कई व्यंजन लोगों की रोजमर्रा की थाली का हिस्सा हैं। चावल शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। खासकर ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और वजन संतुलित बनाए रखने वाले लोगों के लिए इसकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चावल को पूरी तरह खाना छोड़ देना चाहिए।

1. ब्लड शुगर बढ़ने का हो सकता है खतरा

यूट्यूबर ध्रुव राठी को 2018 के मानहानि मामले में अदालत ने जारी किया जमानती वारंट

यूट्यूबर ध्रुव राठी को 2018 के मानहानि मामले में अदालत ने जारी किया जमानती वारंट

नई दिल्ली। दिल्ली की साकेत अदालत ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ वर्ष 2018 से जुड़े मानहानि मामले में जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला विकास सांक्रित्यायन की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी ने अपने वीडियो ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ में उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए थे।

Exclusive Articles

Mahakumbh part1

महाकुम्भ: सांस्कृतिक विरासत का महापर्व ( Part-1)

कुम्भ... जहाँ गंगा में डुबकी लगाने भर से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जहां स्नान कर सभी अनंत काल तक के लिए धन्य हो जाते हैं...और इस स्नान का महत्व सिर्फ श्रद्धालुओं और साधु-संन्यासियों के लिए ही नहीं है बल्कि देवताओं के लिए भी पवित्र है। इस तरह कुम्भ आदि को अनादि से जोड़ने वाला, मुक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला सनातन संस्कृति की एकतारूपता का अमीयकुम्भ है।

peshwai, mahakumbh

सर्वव्यापी कुम्भ क्यों है अद्वितीय? (Part -2)

आजादी से पहले जब-जब सनातन धर्म, उसकी संस्कृति और देश की रक्षा पर संकट आया, तब-तब राजा-महाराजों के आग्रह पर साधु-संतों ने धर्म प्रचार के साथ-साथ हाथ में तलवार उठाकर भी धर्म, संस्कृति और देश की रक्षा भी की। तभी से जहाँ भी कुम्भ का आयोजन होता था, वहाँ साधु संतों को राजा महाराजा अपने रथ हाथी घोड़ों पर शाही तरीके से कुंभ में पेश कराते थे। चुकि पहले राजाओं को पेशवा भी कहा जाता था, इसलिए संतों के कुंभ में प्रवेश को पेशवाई कहा जाने लगा... और यह ऐतिहासिक परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरे शान-ओ-शौकत के साथ जारी है।

Atal Bihari Vajpayee

कर्म और विचार दोनों में अटल थे वाजपेयी

‘जीवन बंजारों का डेरा... आज यहाँ कल कहां कूच है... कौन जानता किधर सबेरा’... कविता की इन दार्शनिक पंक्तियों में जीवन का फलसफा छुपा हुआ है जिसे अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर कहा करते थे। बिना किसी भय के पूरी निडरता के साथ भविष्य में घटने वाली हर अनहोनी के लिए तैयार रहना उसे स्वीकार करना किसी सामान्य व्यक्ति के बस की बात नहीं होती.... इसीलिए तो विशेष और असामान्य थे अटल बिहारी वाजपेयी.... जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता और सहृदयता से करोड़ों भारतीयों के दिलों में घर बनाई।

Rashtrakavi Ramdhari Singh

रामधारी सिंह दिनकर: राष्ट्रचेतना और जनजागरण के कवि

जीवन भर अपनी रचनाओं में जन-जागरण के लिए हुंकार की गर्जना भरने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर न केवल हिंदी साहित्य के भंडार को विविध विधाओं से भरने का यत्न करते रहे बल्कि क्रांति-चेतना के प्रखर प्रणेता बनकर अपनी कविताओं के जरिए राष्ट्र प्रेम का अलख जगाते रहे। दरअसल राष्ट्रीय कविता की जो परम्परा भारतेन्दु से शुरू हुई उसकी परिणति हुई दिनकर की कविताओं में। उनकी रचनाओं में अगर भूषण जैसा कोई वीर रस का कवि बैठा था, तो मैथिलीशरण गुप्त की तरह लोगों की दुर्दशा पर लिखने और रोनेवाला एक राष्ट्रकवि भी।

Bihar is the land of Buddha, not war...A confluence of glorious history, tradition, and modernity

बिहार की भूमि पर ही पहली बार केंद्रीकृत शासन प्रणाली की शुरुआत हुई और शक्तिशाली महाजनपद अस्तित्व में आए। बिहार में ही विश्व का पहला गणतंत्र यानी रिपब्लिक की परिकल्पना साकार हुई। सम्राट अशोक ने यहीं से पहली बार एक कल्याणकारी राज्य का आदर्श प्रस्तुत किया। ब्रिटिश सत्ता को पहली बार सशक्त चुनौती देनेवाला जन आंदोलन, वहाबी आंदोलन यही संगठित हुआ। 1857 में बाबू कुँवर सिंह और पीर अली जैसे देशभक्तों ने ब्रिटिश सत्ता को यहीं से ललकारा था। महात्मा गाँधी ने पहली बार सत्याग्रह का प्रयोग भारत में जन आंदोलन के हथियार के रूप इसी धरती पर किया। स्वतंत्र भारत का प्रथम राष्ट्रपति इसी भूमि ने प्रदान किया औ

Video In-Depth & Explainer

COP26 SUMMIT | CLIMATE CHANGE AND CHALLENGES

दुनिया भर में तूफान, बाढ़ और जंगल में आग की घटना दिनोंदिन तेजी से बढ़ती जा रही है। वायु प्रदूषण लाखों लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। मौसम में अप्रत्याशित बदलाव की वजह से लाख

VISHAY VISHESH: UNITED NATIONS | संयुक्त राष्ट्र

1939 से 1945 तक चले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुए विध्वंस और इससे पहले प्रथम विश्वयुद्ध के विनाश से दुनिया के तमाम देश तंग आ चुके थे। इस विनाशकारी प्रभाव से बचने के लिए दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ह

G20 Leaders’ Summit 2021 | Vishay Vishesh on G20

कोविड-19 वैश्विक महामारी ने जहां पूरे विश्व की अर्थव्यस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है...वहीं जलवायु परिवर्तन की चुनौती से पूरी दुनिया जूझ रही है...साथ ही, वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की ब

Vishay Vishesh | Samvidhan Divas | Constitution Day | Constitution of India

सैकड़ों साल की दासता और गुलामी के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। भारत की आजादी उसकी जनता के लिए एक ऐसे युग की शुरुआत थी जो एक नए दर्शन, विचार और सिद्धांत से प्रेरित था...

Importance of Putin Visit to India : Indo-Russia relations

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन छह दिसंबर को भारत दौरे पर आ रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ नई दिल्ली में होने वाले 21 वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्स

होम

↑