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मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लिया राजनैतिक दलों से SIR पर फीडबैक

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लिया राजनैतिक दलों से SIR पर फीडबैक

सामान्य विसंगति वाले नोटिसों का बीएलओ स्तर पर करें निस्तारण- सीईओ

अभी तक 19 लाख मतदाताओं को भेजे नोटिस

फार्म 6 के 93 हजार आवेदन, फार्म 8 के 40 हजार आवेदन प्राप्त

देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने बुधवार को मोन्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से बैठक कर एसआईआर के सम्बंध में विस्तृत चर्चा कर फीडबैक प्राप्त किया। इस अवसर एसआईआर के नोटिस फेज में चल रही सुनवाई के सम्बंध में भी राजनैतिक दलों को विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अवगत कराया।

सुरक्षा, सेवा और समर्पण का संगम—SDRF ने शंकराचार्य चौक पर लगाया निःशुल्क चिकित्सा शिविर

सुरक्षा, सेवा और समर्पण का संगम—SDRF ने शंकराचार्य चौक पर लगाया निःशुल्क चिकित्सा शिविर

हरिद्वार - अर्पण यदुवंशी, सेनानायक SDRF उत्तराखण्ड के निर्देशन में कांवड़ यात्रा-2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए SDRF उत्तराखण्ड निरंतर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर रही है। एक ओर SDRF की टीमें हरिद्वार जनपद के विभिन्न संवेदनशील घाटों एवं ड्यूटी प्वाइंट्स पर 24×7 मुस्तैदी के साथ तैनात रहकर आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित रेस्क्यू कार्य कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर मानवता एवं जनसेवा के अपने मूल उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।

क्या वजन घटाने के लिए रोटी छोड़ना जरूरी है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

क्या वजन घटाने के लिए रोटी छोड़ना जरूरी है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

अक्सर वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोग सबसे पहले अपनी डाइट से रोटी को बाहर कर देते हैं। उनका मानना होता है कि रोटी खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है। यदि सही मात्रा में और संतुलित आहार के साथ रोटी का सेवन किया जाए, तो यह वेट लॉस प्लान का हिस्सा भी बन सकती है। आइए जानते हैं कि वजन घटाने के दौरान रोटी को लेकर क्या सच है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने की वाह्य सहायतित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने की वाह्य सहायतित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को वाह्य सहायतित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने इसके तहत् पूर्ण हो चुकी, गतिमान एवं भावी परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी ली एवं दिशा निर्देश दिए। उन्होंने वाह्य सहायतित परियोजनाओं के अंतर्गत प्रदेश में आधारभूत संरचनाओं के विकास पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए।

11 अगस्त को देहरादून में रोजगार मेला, 559 पदों पर होगा चयन

11 अगस्त को देहरादून में रोजगार मेला, 559 पदों पर होगा चयन

क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में शुरू हुआ पंजीकरण, विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियां लेंगी साक्षात्कार

देहरादून। जनपद के बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, देहरादून द्वारा आगामी 11 अगस्त, 2026 को प्रातः 9.30 बजे से कार्यालय परिसर में एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। रोजगार मेले में विभिन्न प्रतिष्ठित निजी कंपनियां कुल 559 रिक्त पदों के लिए योग्य अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेकर चयन प्रक्रिया संपन्न करेंगी।

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Mahakumbh part1

महाकुम्भ: सांस्कृतिक विरासत का महापर्व ( Part-1)

कुम्भ... जहाँ गंगा में डुबकी लगाने भर से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जहां स्नान कर सभी अनंत काल तक के लिए धन्य हो जाते हैं...और इस स्नान का महत्व सिर्फ श्रद्धालुओं और साधु-संन्यासियों के लिए ही नहीं है बल्कि देवताओं के लिए भी पवित्र है। इस तरह कुम्भ आदि को अनादि से जोड़ने वाला, मुक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला सनातन संस्कृति की एकतारूपता का अमीयकुम्भ है।

peshwai, mahakumbh

सर्वव्यापी कुम्भ क्यों है अद्वितीय? (Part -2)

आजादी से पहले जब-जब सनातन धर्म, उसकी संस्कृति और देश की रक्षा पर संकट आया, तब-तब राजा-महाराजों के आग्रह पर साधु-संतों ने धर्म प्रचार के साथ-साथ हाथ में तलवार उठाकर भी धर्म, संस्कृति और देश की रक्षा भी की। तभी से जहाँ भी कुम्भ का आयोजन होता था, वहाँ साधु संतों को राजा महाराजा अपने रथ हाथी घोड़ों पर शाही तरीके से कुंभ में पेश कराते थे। चुकि पहले राजाओं को पेशवा भी कहा जाता था, इसलिए संतों के कुंभ में प्रवेश को पेशवाई कहा जाने लगा... और यह ऐतिहासिक परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरे शान-ओ-शौकत के साथ जारी है।

Atal Bihari Vajpayee

कर्म और विचार दोनों में अटल थे वाजपेयी

‘जीवन बंजारों का डेरा... आज यहाँ कल कहां कूच है... कौन जानता किधर सबेरा’... कविता की इन दार्शनिक पंक्तियों में जीवन का फलसफा छुपा हुआ है जिसे अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर कहा करते थे। बिना किसी भय के पूरी निडरता के साथ भविष्य में घटने वाली हर अनहोनी के लिए तैयार रहना उसे स्वीकार करना किसी सामान्य व्यक्ति के बस की बात नहीं होती.... इसीलिए तो विशेष और असामान्य थे अटल बिहारी वाजपेयी.... जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता और सहृदयता से करोड़ों भारतीयों के दिलों में घर बनाई।

Rashtrakavi Ramdhari Singh

रामधारी सिंह दिनकर: राष्ट्रचेतना और जनजागरण के कवि

जीवन भर अपनी रचनाओं में जन-जागरण के लिए हुंकार की गर्जना भरने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर न केवल हिंदी साहित्य के भंडार को विविध विधाओं से भरने का यत्न करते रहे बल्कि क्रांति-चेतना के प्रखर प्रणेता बनकर अपनी कविताओं के जरिए राष्ट्र प्रेम का अलख जगाते रहे। दरअसल राष्ट्रीय कविता की जो परम्परा भारतेन्दु से शुरू हुई उसकी परिणति हुई दिनकर की कविताओं में। उनकी रचनाओं में अगर भूषण जैसा कोई वीर रस का कवि बैठा था, तो मैथिलीशरण गुप्त की तरह लोगों की दुर्दशा पर लिखने और रोनेवाला एक राष्ट्रकवि भी।

Bihar is the land of Buddha, not war...A confluence of glorious history, tradition, and modernity

बिहार की भूमि पर ही पहली बार केंद्रीकृत शासन प्रणाली की शुरुआत हुई और शक्तिशाली महाजनपद अस्तित्व में आए। बिहार में ही विश्व का पहला गणतंत्र यानी रिपब्लिक की परिकल्पना साकार हुई। सम्राट अशोक ने यहीं से पहली बार एक कल्याणकारी राज्य का आदर्श प्रस्तुत किया। ब्रिटिश सत्ता को पहली बार सशक्त चुनौती देनेवाला जन आंदोलन, वहाबी आंदोलन यही संगठित हुआ। 1857 में बाबू कुँवर सिंह और पीर अली जैसे देशभक्तों ने ब्रिटिश सत्ता को यहीं से ललकारा था। महात्मा गाँधी ने पहली बार सत्याग्रह का प्रयोग भारत में जन आंदोलन के हथियार के रूप इसी धरती पर किया। स्वतंत्र भारत का प्रथम राष्ट्रपति इसी भूमि ने प्रदान किया औ

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COP26 SUMMIT | CLIMATE CHANGE AND CHALLENGES

दुनिया भर में तूफान, बाढ़ और जंगल में आग की घटना दिनोंदिन तेजी से बढ़ती जा रही है। वायु प्रदूषण लाखों लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। मौसम में अप्रत्याशित बदलाव की वजह से लाख

VISHAY VISHESH: UNITED NATIONS | संयुक्त राष्ट्र

1939 से 1945 तक चले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुए विध्वंस और इससे पहले प्रथम विश्वयुद्ध के विनाश से दुनिया के तमाम देश तंग आ चुके थे। इस विनाशकारी प्रभाव से बचने के लिए दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ह

G20 Leaders’ Summit 2021 | Vishay Vishesh on G20

कोविड-19 वैश्विक महामारी ने जहां पूरे विश्व की अर्थव्यस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है...वहीं जलवायु परिवर्तन की चुनौती से पूरी दुनिया जूझ रही है...साथ ही, वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की ब

Vishay Vishesh | Samvidhan Divas | Constitution Day | Constitution of India

सैकड़ों साल की दासता और गुलामी के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। भारत की आजादी उसकी जनता के लिए एक ऐसे युग की शुरुआत थी जो एक नए दर्शन, विचार और सिद्धांत से प्रेरित था...

Importance of Putin Visit to India : Indo-Russia relations

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन छह दिसंबर को भारत दौरे पर आ रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ नई दिल्ली में होने वाले 21 वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्स

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